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ब्रिटेन ने सुधारी गलती, पहले विश्व युद्ध में शहीद हुए 33,000 भारतीय सैनिकों को अब मिला सम्मान; जानें पूरा मामला

 Published : Apr 24, 2026 10:09 pm IST,  Updated : Apr 24, 2026 10:09 pm IST

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इराक (उस समय मेसोपोटामिया) में अपनी जान कुर्बान करने वाले 33,000 भारतीय सैनिकों को आखिरकार उनका उचित सम्मान मिल गया है। यह भारत के लिए गर्व और सम्मान की बात है।

First World War Soldiers - India TV Hindi
First World War Soldiers Image Source : AP

लंदन: पहले विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सेना के 33,000 सैनिकों के नाम, जो इराक में बने एक स्मारक से गायब थे, अब आखिरकार डिजिटल रूप में दर्ज कर लिए गए हैं। कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव कमीशन (CWGC) नाम की एक संस्था है, जो दोनों विश्व युद्धों में शहीद हुए ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के सैनिकों और महिलाओं को याद करती है। इस संस्था ने बसरा स्मारक के लिए नए डिजिटल नाम पैनल शुरू किए हैं। इस महीने की शुरुआत में लॉन्च किए गए इन डिजिटल पैनलों में पहली बार 33,000 भारतीय सैनिकों के नाम शामिल किए गए हैं। इनके साथ 46,000 से ज्यादा अन्य देशों के सैनिकों के नाम भी हैं।

'यह पुरानी गलती को सुधारने जैसा है'

CWGC की सदस्य और लेखिका श्रबानी बसु ने कहा, “मेसोपोटामिया का अभियान पहले विश्व युद्ध का बहुत कठिन अभियान था। इसमें हजारों भारतीय सैनिक शहीद हुए, लेकिन उनके नाम बसरा स्मारक पर कभी नहीं लिखे गए। अब नए डिजिटल पैनल देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। आखिरकार इन 33,000 सैनिकों के नाम उनके रैंक और रेजिमेंट के साथ दिखाए जा रहे हैं। यह एक पुरानी गलती को सुधारने जैसा है। इनका बलिदान अब कभी नहीं भुलाया जाएगा।”

डिजिटल माध्यम को क्यों चुना गया?

इराक में सुरक्षा की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण स्मारक पर बड़े बदलाव करना मुश्किल था। इसलिए, CWGC ने डिजिटल माध्यम को चुना। जब तक वहां जाकर सही से काम नहीं हो जाता, तब तक ये डिजिटल पैनल इस्तेमाल किए जाएंगे। CWGC के इतिहासकार डॉ जॉर्ज हे ने कहा,

“यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण पल है। पहली बार इन भारतीय सैनिकों के नाम ठीक उसी तरह दिखाए जा रहे हैं, जैसे उन्हें 100 साल पहले दिखाए जाने चाहिए थे। अब उन्हें वह सम्मान मिल रहा है जिसके वो हकदार थे। यह ऐतिहासिक गलती को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”

नाम से नहीं, संख्या से किया जाता था याद

पहले विश्व युद्ध में कई भारतीय सैनिकों को नाम से नहीं, बल्कि सिर्फ संख्या से याद किया जाता था। CWGC अब ऐसी सारी असमानताओं को दूर करने की कोशिश कर रहा है। संस्था ने बताया कि डिजिटल स्मारक भौतिक स्मारक की जगह नहीं ले सकते, लेकिन वो उसकी मदद करते हैं। इससे दुनिया भर के लोग आसानी से इन शहीदों की कहानियां पढ़ और साझा कर सकते हैं, भले ही वो खुद स्मारक पर ना जा सकें।

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